➤ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 31 मार्च तक डिलिमिटेशन और आरक्षण रोस्टर पूरा करने के निर्देश
➤ 31 मई तक पंचायत चुनाव करवाना अनिवार्य, समयसीमा में विस्तार नहीं
➤ 20 फरवरी से प्रक्रिया शुरू, नई पंचायतों का गठन भी तय समय में
हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार ने डिलिमिटेशन और आरक्षण रोस्टर की प्रक्रिया 31 मार्च 2026 तक हर हाल में पूरी करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। पंचायतीराज विभाग ने सभी जिलों के डीसी को पत्र जारी कर तय समयसीमा के भीतर लंबित प्रक्रियाएं पूरी करने को कहा है।
यह आदेश राज्य सरकार की एसएलपी पर 13 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश के बाद जारी हुए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि 31 मार्च तक डिलिमिटेशन और आरक्षण की प्रक्रिया पूरी की जाए और इसके आठ सप्ताह के भीतर, यानी 31 मई तक चुनाव कराए जाएं। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि समयसीमा में किसी प्रकार का विस्तार नहीं दिया जाएगा।
विभाग द्वारा जारी शेड्यूल के अनुसार डिलिमिटेशन प्रस्ताव की अधिसूचना 20 फरवरी तक जारी करनी होगी। प्रस्तावों पर आपत्तियां दर्ज कराने के लिए 27 फरवरी तक सात दिन का समय दिया जाएगा। दो दिन के भीतर 2 मार्च तक अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। इसके बाद अपील के लिए 11 मार्च तक दस दिन की अवधि रहेगी और अपीलों की सुनवाई सात दिन में पूरी की जाएगी। अपीलों के निपटारे के बाद 20 मार्च 2026 तक अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। निर्वाचन क्षेत्रों का अंतिम आरक्षण 31 मार्च तक अनिवार्य रूप से पूरा करना होगा।
पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ब्लॉकों के पुनर्गठन और नई ग्राम पंचायतों के गठन से जुड़े लंबित डिलिमिटेशन कार्य 20 मार्च से पहले पूरे किए जाएं। यदि कहीं नई पंचायतें बनाई जानी हैं तो उनका गठन भी तय समयसीमा में किया जाएगा।
सभी जिलों के डीसी को जिला परिषद वार्ड, पंचायत समिति और ग्राम पंचायत वार्डों का डिलिमिटेशन तय कार्यक्रम के अनुसार करना होगा। जहां पहले यह प्रक्रिया नहीं हुई है, वहां प्राथमिकता से कार्रवाई की जाएगी।
प्रदेश की 3577 पंचायतों और 73 नगर निकायों में चुनाव होने हैं। पंचायत प्रतिनिधियों का पांच वर्ष का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो चुका है, जिसके बाद सरकार ने पंचायतों में प्रशासक नियुक्त कर रखे हैं। इसी प्रकार 47 नगर निकायों में भी कार्यकाल पूरा होने के बाद प्रशासक तैनात किए गए हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह सक्रिय हो गई है और प्रदेश में पंचायत चुनावों की तैयारियां तेज हो गई हैं।



